NIOS SOCIOLOGY (331) | IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWERS (20-21)-HINDI-MEDIUM

 

SOCIOLOGY (331)

IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWERS (20-21)

प्रश्न:- भारतीय समाजशास्त्र को आप कितने काल खंडों में विभाजित कर सकते हैं? 

उत्तर: भारत में समाजशास्त्र के को तीन काल खंडों में बांटा जा सकता हैं। पहला कालखंड, जो 1769 से 1900 तक का है। इस कालखंड में, समाजशास्त्र की नींव पड़ी। 1901 से 1950 के दूसरे कालखंड में समाज विज्ञान एक विश्वविद्यालयी  विषय, एक लाडवा व्यवसाय बन गया।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शुरू हुए तीसरे कालखंड में, सुनियोजित विकास के कार्यक्रमों, विदेशी विशेषज्ञों के साथ भारतीय समाज विज्ञानियों के बढ़ते विचार विमर्श, शोध के लिए धन की उपलब्धता और शोध एवं प्रकाशनों की व्यवस्था में तेजी आई। 

 प्रश्न: समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान के बीच क्या संबंध हैं? 

 उत्तर: राजनीतिक विज्ञान को ' सरकार की विज्ञान' या 'राजनीति का विज्ञान' माना जाता है। इसे राज्य और शक्ति के अंगों को व्यवस्थित अध्ययन से परिभाषित किया जाता है। राजनीति विज्ञान समाज में शक्ति के बंटवारे की प्रकृति का अध्ययन किया जाता है, तथा शक्ति के लिए स्पर्धा के नियम, एवं सरकार की प्रकृति एवं कार्य (व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) का अध्ययन कराता है। राजनीति विज्ञान आधुनिक जटिल एवं विकसित समाज का प्रायः अध्ययन करता है। विकसित समाज से तात्पर्य है वह समाज जिसके पास लिखित कानून तथा राज्य का प्रशासनिक यंत्र हो। इसका संबंध वृहत् व्यवस्था से है जैसे कि पूरा समाज और उसके राजनीतिक स्थिति, न कि छोटे-छोटे इकाई जिसके लिए समाजशास्त्री प्रसिद्ध हैं। राजनीतिक विज्ञान समाज में गहन क्षेत्र-कार्य नहीं करते हैं। वे क्षेत्र में जाकर आंकड़ा संग्रह करने पर कम बल देते हैं। इनके आंकड़े प्रकाशित दस्तावेजों, जनगणना, कार्यालय सूचनाएं, संसद की कार्यवाही, जनमत संग्रह तथा चुनाव परिणाम आदि से प्राप्त होते हैं। 

 प्रश्न:- समाजशास्त्र और सामाजिक कार्य के बीच क्या संबंध हैं? 

 उत्तर:- समाजशास्त्र और सामाजिक कार्य के बीच ठीक वैसा ही संबंध है जैसे कि ' शुद्ध विज्ञान' और 'व्यवहारिक ज्ञान'। सामाजिक कार्य मानव समूह के सुधार के लिए विचारों की तकनीक के उपयोग से संबंध है। 

सामाजिक कार्य अनिवार्य रूप से अमेरिकी अवधारणा है। इसका विकास मानव कल्याण हेतु हुआ। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में यह महसूस किया गया कि सामाजिक विज्ञानिक मुख्य रूप से समाज के कार्यशैली के बारे में ज्ञान प्राप्त करने तथा इस पर दार्शनिक संवाद देने से संबंध थे।आदर्श समाज का प्रश्न भी उठा था परंतु इसे बनाने के लिए किस तकनीक का प्रयोग किया जाए इस बात पर नहीं सोचा गया। बीसवीं शताब्दी में गरीब और अमीर व्यक्तियों के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा था, तथा समाज में परिवर्तन हो रहे थे। असहाय व्यक्ति बढ़ते जा रहे थे। इस परिस्थिति में लोगों की स्थिति में सुधार लाना है मुख्य बिंदु था। ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता है, जब तक कि इसको प्रयोग में नहीं लाया जाता। सामाजिक कार्य इसी परिस्थिति की देन थी। यह मनुष्यों के उत्थान के लिए उपयुक्त तकनीकी साबित हुआ।  

NIOS NOTES ALSO PROVIDED 

CONTACT NO.8638447739,WHATSAPP NO.9085652867

 

 

 

Post a Comment

0 Comments