NIOS ECONOMICS (214) | IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWERS-HINDI-MEDIUM

ECONOMICS (214)

IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWERS (20-21)

प्रश्न:- विकास के स्तर के आधार पर अर्थव्यवस्था के दो वर्ग कौन- से हैं? 

 उत्तर:- विकास के स्तर के आधार पर अर्थव्यवस्था को विकसित तथा विकासशील में बांटा जा सकता है। 

 प्रश्न:- आर्थिक विकास का सरल अर्थ लिखिए। 

 उत्तर:- आर्थिक विकास की प्रक्रिया में अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में दीर्घकालिक वृद्धि होती है। 

 प्रश्न:- आर्थिक विकास के निर्धारकों के आर्थिक कारक दीजिए। 

 उत्तर:- प्राकृतिक संसाधन, मानवीय संसाधन, पूंजी निर्माण, प्रौद्योगिकी आदि विकास के आर्थिक कारक हैं। 

 प्रश्न:- विकास को प्रभावित करने वाले गैर-आर्थिक कारक क्या हैं? 

 उत्तर:- जाति प्रथा, परिवार का प्रकार, वंशक्रू आदि गैर-आर्थिक कारक हैं, जिनसे विकास प्रभावित होता है। 

 प्रश्न:- आर्थिक संवृद्धि तथा आर्थिक विकास में भेद कीजिए। 

 उत्तर:- वास्तविक आय अल्पकालिक सुधार है, जबकि दीर्घकालिक आय में वृद्धि के साथ-साथ जीवन स्तर और गुणवत्ता में सुधार आर्थिक विकास की अवस्था है। 

 प्रश्न:- अर्थव्यवस्था से क्या अभिप्राय हैं? 

 उत्तर:- अर्थव्यवस्था मानवीय आवश्यकताओं की पुष्टि के लिए गधी गई व्यवस्था या संगठन का नाम है। ए.जे. ब्राउन के अनुसार, "अर्थव्यवस्था वह पद्धति है, जिसके अनुसार कोई समाज अपनी आजीविका कमाता है।" अर्थव्यवस्था वह संरचना है, जिसके अंतर्गत सभी आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता है। अर्थव्यवस्था एक मानव-निर्मित संगठन है। इसे समाज की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया, बदला और विघटित भी किया जा सकता है। 

 प्रश्न:- एकल उपयोग उपभोक्ता वस्तु क्या हैं?  

 उत्तर:- एकल श्रेणी के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं का उपयोग केवल एक बार ही किया जा सकता है। एक बार उपभोग के पश्चात ए वस्तुएं नष्ट हो जाती हैं। जैसे-रोटी, चावल, दूध इत्यादि। 

 प्रश्न:- कृषि भूमि एक अचल संसाधन है। उसकी उत्पादकता को कैसे बढ़ाया जा सकता है? 

 उत्तर:- भूमि को कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण एवं आधारभूत साधन माना गया है। किसी भी देश की प्रगति एवं विकास उस देश की भूमि की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करता है। भूमि प्रकृति का उपहार है। यद्यपि भूमि में दबे हुए उपयोगी पदार्थ और शक्तियां,जो मनुष्य को प्रकृति द्वारा निशुल्क प्राप्त हुई है, भूमि की उपयोगिता को अत्यधिक बना देती हैं। परंतु भूमि की उपजाऊ क्षमता का लगातार दोहन भूमि की उत्पादन शक्ति को कम कर देता है। अतः बेहतर सिंचाई सुविधाओं मशीनों तथा फसल उत्पादन संबंधी उपयुक्त बहूफसल प्रणालियों द्वारा भूमि की उर्वरा एवं उपजाऊ क्षमता को अधिक समय तक सुनिश्चत तथा स्थिर किया जा सकता है।  

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