NIOS SOLVED ASSIGNMENTS SUBJECT NAME: ECONOMICS(214) HINDI MEDIUM TMA/2019-2020


NIOS SOLVED ASSIGNMENT
TMA – 2019/2020
SECONDARY
अर्थशास्त्र (214)
1.(a)व्यष्टि -अर्थशास्त्र तथा समष्टि-अर्थशास्त्र के बीच एक अंतर बताइए। 
 उत्तर: व्यष्टि -अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र के बीच अंतर निम्नलिखित हैं:-
(i).एक व्यक्ति विक्रेता के रूप में वस्तुओं तथा सेवाओं का विक्रय भी करता है यहां उसे दी गई कीमत पर वस्तु की आपूर्ति की मात्रा के बारे में निर्णय लेना पड़ता है ताकि वह कुछ लाभ कमा सके। 
(ii). समष्टि अर्थशास्त्र एक व्यक्ति की तुलना में समाज अथवा देश अथवा संपूर्ण अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है। इसलिए संपूर्ण अर्थव्यवस्था के अवसर पर लिए गए निर्णय समष्टि अर्थव्यवस्था की विषय वस्तु है। 

2.(a)अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं का महत्व और भूमिका बताइए। 
उत्तर:- वस्तुओं और सेवाओं की अर्थव्यवस्था में बहुमुखी भूमिका होती है इनकी भूमिका इन के संदर्भ में समझाई जा सकती है : 
1. मानवीय आवश्यकताएं :-मानवीय आवश्यकताएं असीमित होती हैं और उनमें हमेशा वृद्धि होती रहती है। इससे अभिप्राय है कि यदि वस्त्र,जूते,फर्नीचर, बर्तन,टेलीविजन,स्कूटर,फल,सब्जियां,अनाज आदि वस्तुओं तथा डॉक्टर,नलके के तथा बिजली के मिस्त्रीयो की  सेवाओं आदि की उपलब्धता में वृद्धि हो जाये तो इनसे अधिक मानवीय आवश्यकताओं की तुष्टि होगी। 
2. उत्पादन:-बागी ती हुई मानवीय आवश्यकताओं की तुष्टि करने के लिए हमें उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है।परंतु इन उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता में वृद्धि अधिक उत्पादक वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर होती है।यदि हमारे पास अधिक और बेहतर मशीनें,कच्चामाल, ट्रैक्टर ,बीज,खाद आदि हैं तो हम अधिक उत्पादन कर पाएंगे। 
3. निवेश:-वास्तु और सेवाओं के उत्पादन की वृद्धि ही निवेश के अवसर की निर्धारक है। एस उत्पादन का एक अंश है मानवीय आवश्यकताओं की तुष्टि करने में काम आता है।उपभोग से बचा भाग ही आगे उत्पादन वृद्धि में काम आता है क्योंकि इसी से अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण होता है।यदि वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन अधिक हो तो उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि करना संभव हो जाता है। 

3.(a) भारत जैसे, अल्पविकसित देश के लिए 'कैसे उत्पादन किया जाए' एक जटिल समस्या है।व्याख्या कीजिए कैसे। 
उत्तर:-अर्थव्यवस्था को यह भी निश्चित करना है कि किन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जाए  तथा कैसे किया जाए उत्पादन के समस्याओं का हम कुछ इस तरह से निवारण कर सकते हैं। 
(i). संसाधनों के आबंटन की समस्या:- वास्तु और सेवाओं का उत्पादन कैसे किया जाए? या उस विधि से संबंधित है जिसके द्वारा इनका उत्पादन किया जाना है।एक बार जब यह निश्चित हो जाता है कि किन वस्तुओं का उत्पादन होना है तो समस्या है कि उनका उत्पादन कैसे किया जाए किन साधनों की आवश्यकता है कितनी भूमि तथा कितने श्रमिकों की आवश्यकता है वस्तुओं को बनाने की विधियां होती हैं उदाहरण के लिए कपड़ों का उत्पादन अधिक श्रम तथा का मशीनें लगाकर अथवा अधिक मशीनें तथा काम श्रम लगाकर किया जा सकता है यदि वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन अधिक श्रम तथा कम पूंजी लगाकर किया जाता है तो उसे उत्पादन की श्रम-गहन विधि कहते हैं।जब वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन अधिक पूंजी तथा कम श्रम लगाकर किया जाता है तो इसे उत्पादन की पूंजी विधि कहते हैं 

(ii). पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों का आवंटन:-पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसमें उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है तथा वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन अधिकतम लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है।पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं तथा सेवाओं के चयन के मार्गदर्शन के लिए कोई केंद्रीय अधिकारी नहीं होता। उत्पादन व्यक्तियों-कृषक, विनिर्माताओं, उत्पादकों, सेवाएं प्रदान करने वाले  तथा अन्य व्यक्तियों के हाथों में होता है। संसाधन जैसे भूमि,श्रम पूंजी आदि लोगों के निजी स्वामित्व में होते हैं। केवल उन वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनकी मांग उपभोक्ताओं द्वारा होती है। वे वस्तुओं का उत्पादन सबसे सस्ती विधियों द्वारा करते हैं ताकि वे अधिकतम लाभ कमा सकें। ये व्यक्तिगत उत्पादक उन वस्तुओं के उत्पादन से जिन्हें लोग नहीं खरीदते हैं अपने संसाधनों को हटाकर उन वस्तुओं के उत्पादन में लगाते हैं जिन्हें लोग खरीदना पसंद करते हैं।वस्तुएं उन लोगों के लिए होती हैं जो ऐसी वस्तुओं की मांग करते हैं तथा उन्हें खरीदने में समर्थ हैं। 

(iii) नियोजित आर्थिक प्रणाली में संसाधनों का आवंटन:-नियोजित आर्थिक प्रणाली में सरकार का एक केंद्रीय आयोजना अधिकारी होता है जो क्या उत्पादन किया जाए कैसे उत्पादन किया जाए तथा जिसके लिए उत्पादन किया जाए का निर्णय लेता है। योजना अधिकारी उत्पादन के लक्ष्यों को निर्धारित करता है।सरकार लक्ष्यों को निर्धारित करती है तथा फॉर्म लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयत्न करती है। जवला चौपड़ सहमति हो जाती है तो फॉर्म उत्पादन आरंभ कर देती है। यह बाजार अर्थव्यवस्थाओं की भांति नहीं होती जहां वे लोग जिनके पास धन है अपनी आवश्यकताओं की तुष्टि कर सकते हैंतथा वे लोग जिनके पास धन नहीं हैं अपनी आस्थाओं को संतुष्ट करने के लिए वस्तुएं खरीदने में समर्थ नहीं होते।

4.(a) वास्तविक तथा आदर्श अर्थशास्त्रक की अवधारणाओं की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। 
उत्तर:-वास्तविक तथा आदर्श अर्थशास्त्रक:-अर्थशास्त्र के अध्ययन में हमारे चारों ओर होने वाली घटनाओं निर्णय लेने नियम तथा व्यवस्था बनाने तथा आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए नीतियां लागू करने के संबंध में वास्तविक तथा आदर्श दोनों पहलुओं सम्मिलित होते हैं। वास्तविक अर्थशास्त्र 'क्या है'के विषय में बात करता है जबकि आदर्श और शास्त्र 'क्या होना चाहिए'के विषय में बात करता है।वास्तविक और शास्त्र आर्थिक विषयों में जो कुछ हो रहा है अथवा हो सकता है, के विषय में बात करता है। आदर्श और शास्त्र चीजों के बारे में नैतिक मूल्यांकन उपलब्ध कराता है और हमें बताता है 'क्या होना चाहिए था'। इसके उदाहरण निम्नलिखित हैं:-  
कथन(i) एक घटना का वर्णन करता है जो हो रही है। यह एक वास्तविक कथन है। 
कथन(ii) भारत की जनसंख्या का नैतिक मूल्यांकन प्रदान करता है। या एक आदर्श कथन है। 
कथन (iii) एक वास्तविक कथन है। या एक निश्चित तोते के बारे में बताता है। 
कथन (iv) आदर्श प्रकृति का है क्योंकि यह सही चीज के बारे में बताता है, जो यदि होती है तो समाज के लिए अच्छा होगा। 
व्यक्तियों अथवा सरकार अथवा व्यवसाय फॉर्म द्वारा आर्थिक निर्णय लेने में चीजों के वास्तविक तथा आदर्श दोनों पहलू सम्मिलित रहते हैं। 

5.(b) आर्थिक और निःशुल्क वस्तुओं में भेद कीजिए। 
उत्तर:-आर्थिक और निशुल्क वस्तुओं में भेद:-मान लो कि आप किसी रेगिस्तान में हैं और वहां रेत का एक बोरा भर लेते हैं। इसके लिए आपको कोई कीमत नहीं देनी पड़ती।किंतु यदि आप शहर में रेत का बोरा पाना चाहे तो निश्चित ही इसके लिए आपको कीमत चुकानी पड़ेगी। यह उदाहरण निःशुल्क और आर्थिक वस्तुओं का भेद स्पष्ट करता है। निःशुल्क वस्तुएं प्रकृति की दी हुई उपहार है। वे प्रचुरता में उपलब्ध हैं उनकी आपूर्ति मांग से बहुत अधिक होती है। उन्हें पाने के लिए आपको कोई कीमत नहीं देनी पड़ती। इसलिए उन्हें निःशुल्क वस्तुएं कहा जाता है। संक्षेप में, निःशुल्क वस्तुएं वे है जिनमें उपयोगिता तो है पर जो दुर्लभ नहीं है। 
दूसरी ओर, हम अनेक वस्तुएं अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं जैसे कि टूथपेस्ट, साबुन, शेविंग क्रीम, जूते, डबल रोटी आदि। ये सभी मानव निर्मित वस्तुएं हैं। इनके आपूर्ति और सीमित नहीं है। इसी तरह हम कई प्रकार की मशीनों, बसें,मेज, कुर्सी, पुस्तकें, पंखे, टेलीविजन आदि का प्रयोग भी करते हैं। ये भी मानव निर्मित हैं और इनकी आपूर्ति और सीमित नहीं होती। हम अपने घर में पानी का कई कार्यो के लिए प्रयोग करते हैं।रेत का प्रयोग निर्माण कार्यों में तथा अनेक खनिजों का भी भांति भांति प्रकार से प्रयोग करते हैं। यहां ये वस्तुएं प्रकृति की देन है, मानव निर्मित नहीं। किंतु इनकी आपूर्ति मांग की अपेक्षा सीमित रहती हैं। इसी कारण ये निःशुल्क नहीं रहती, इनके लिए कीमत चुकानी पड़ती है। यह आर्थिक वस्तुएं हैं। 
अतः आर्थिक वस्तुएं वे वास्तुए हैं जिनकी मांग आपूर्ति से अधिक होती है। उनकी कीमत चुका कर उन्हें बाजार से खरीदा जा सकता है। 
6.(a) निम्न तालिका को पूरा करो : दिए गए आंकड़ों के आधार पर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करों। 
नम की इकाइयां
औसत उत्पाद 
सीमांत उत्पाद 
1
4
2
5
3
5
4
4
5
3
उत्तर:
नम की इकाइयां
औसत उत्पाद
कुल उत्पाद
सीमांत उत्पाद
1
4
4
4
2
5
10
6
3
5
15
5
4
4
16
1
5
3
15
-1


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